रविवार, 15 सितंबर 2024

चलइ न पाँवइँ, रजाई क फ़ाँड़ बाँन्हइं

भाव - अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भार उठाने का प्रयत्न करने वालों को उलाहना देने के लिये बोला जाता है।

शाब्दिक अथॆ - चल भी न पाये, वो रजाई जैसी भारी वस्तु को धोती की तरह पहन कर चलना चाहे।

(साभार- श्री दल बहादुर सिंह, गहिरी - प्रतापगढ़ , अन्जलिका एवम् गौरव निगम)





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