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रविवार, 15 सितंबर 2024

चलइ न पाँवइँ, रजाई क फ़ाँड़ बाँन्हइं

भाव - अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भार उठाने का प्रयत्न करने वालों को उलाहना देने के लिये बोला जाता है।

शाब्दिक अथॆ - चल भी न पाये, वो रजाई जैसी भारी वस्तु को धोती की तरह पहन कर चलना चाहे।

(साभार- श्री दल बहादुर सिंह, गहिरी - प्रतापगढ़ , अन्जलिका एवम् गौरव निगम)





रविवार, 27 जनवरी 2013

करइं पिसउनि, बजाँवइं ठड़मेंड़रा

करइं  पिसउनि, बजाँवइं  ठड़मेंड़रा 

आमदनी कम हो पर शौक पाले बड़ी चीजों का।
पिसउनि - अनाज पीसने का काम
ठड़मेंड़रा - एक प्रकार का वाद्य यन्त्र

शनिवार, 17 अक्टूबर 2009

करइ मुदरसी, दुई जन खाँइ

करइ मुदरसी, दुई जन खाँइ
लड़िका होइ, ननियउरे जाँइ

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यह उस समय प्रयोग किया जाता था जब अध्यापको का वेतन बहुत कम हुआ करता था. अध्यापन (मुदरसी) करने से केवल दो जानो का ही पेट भर सकता है. इस लिए अध्यापकों के बच्चे अपनी ननिहाल में पाले जाते हैं.