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रविवार, 15 सितंबर 2024

चलइ न पाँवइँ, रजाई क फ़ाँड़ बाँन्हइं

भाव - अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भार उठाने का प्रयत्न करने वालों को उलाहना देने के लिये बोला जाता है।

शाब्दिक अथॆ - चल भी न पाये, वो रजाई जैसी भारी वस्तु को धोती की तरह पहन कर चलना चाहे।

(साभार- श्री दल बहादुर सिंह, गहिरी - प्रतापगढ़ , अन्जलिका एवम् गौरव निगम)





गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

हमार पहिला अवधी ब्लॉग

बहुत दिना से हम अवधी भाषा के बारे में लिखई चाहत रहे लेकुन हमका ई नाई पता रहा की अब देवनागरी लिपि में इन्टरनेट पे लिखायी आसान होई गई बाटे. पिछले शनीचर जब हमई ई पता चला की गूगल क कुछ इंजिनियर मिल के एक नयी तकनिकी क विकास किहे हयेन, तब हमरी खुशी क ठिकाना नाई रहा अउर हम लपक के ई इन्टरनेट ब्लॉग क निर्माण किहे और लिखई बैठि गए. ई ब्लॉग क मध्यम से हम भारत क उत्तरप्रदेश क जौनपुर जिला क तिलवारी/पिल्किछा (बदलापुर) क्षेत्र में बोलई जाई वाली अवधी भाषा क कुछ चुनिन्दा शब्द अउर कहावत सबके सामने प्रस्तुत करबई. हमरी ई प्रस्तुति में आप सब के गड़ेरिहा/कोल्हुआ (जौनपुर) क्षेत्र क अवधियौ क झलक देखाइ पड़े, काहे से कि हमार ननियाउर गड़ेरिहा/कोल्हुआ में बा. कौनो त्रुटी होवै त कृपा कई के ओका सामने लावै, हम सुधार करइ क पूरा प्रयत्न करबई. आप सबन के सहयोग से हमार सबे क आवै वाली पीढी और देश-दुनिया के बाकी जने क बीच में अवधी भाषा क जानकारी बढ़त रहे. धन्यवाद.

गूगल क ट्रांस्लितेरेशन तकनिकी क बारे में ज्यादा जानकारी बिना आप ई इन्टरनेट पते पे जावे.