रविवार, 11 जनवरी 2009

भिनसार: आज क् अवधी

११-जनवरी-२००९: आज क् अवधी
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भिनसार
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सुबह, सवेरे

वाक्य में प्रयोग
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काल भिनसारेन से गोहूँ क् कटाई होए, जल्दी उठि जायऽ.
(कल सुबह से ही गेहूं की कटाई होगी, जल्दी उठ जाना.)

टिप्पणी:
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एही के नायि एक शब्द अउर बाटइ, "भेन्नही". एकर प्रयोग ई वाक्य में समझ में आए ; "भेन्नही होई गई, उठि जा."
आपके क्षेत्र में 'सुबह' बिना कउन शब्द बोलि जात हऽ? जरूर बतावइँ.

विशेष:
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नए वर्ष की सुबह, गोविन्द माथुर की एक कविता अनुभूति के सौजन्य से.

2 टिप्‍पणियां:

  1. हमें पूर्वांचल नहीं अवध चाहिए... जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश के चार खंड होने वाले है॥ उससे यह मालुम होने लगा है। की उत्तर प्रदेश के टुकड़े न हो तो अच्छा होगा। जैसे की आप सुबह जब मै अखबार पढ़ा तो उसमे लिखा था की इलाहबाद ,प्रतापगढ़,फ़तेह पुर ये सब पूर्वांचल में आयेगे॥ ये बात मेरे समझ में नहीं आ रही है। क्यों की इलाहबाद ,फतेहपुर। प्रतापगढ़, इन सब की बोलिया अवधी है । इस लिए इन जिलो को अवध में सम्लित किया जाना चाहिए। वैसे जब से थोड़ा भोजपुरी का उत्थान होने लगा है हमारी अवधी भाषा विलुप्त के कगार में आके खड़ी है। क्यों की हमारे लोगो के जिलो में अभूत से कलाकार.खिलाडी है। न उनको अभी तवज्जो मिल रही है । और न बाद में मिलने की संभावना रहेगी। क्यों वैसे हम गीत लिखते है अवधी और हिंदी में लेकिन मै १० साल से कोशिस कर रहा की कोई सिंगर मेरा गीत गाये। लेकिन हमें अधिकतर यही कहा जाता है। की हम अवधी की जगह भोजपुरी के लिखे वैसे ये तीनो जिले गरीब रेखा नीचे ही आते होगे। अ गर ये पूर्वांचल में सम्मलित किये गए तो निश्चित ही ..इअके दिन बुरे आ जायेगे। इस सब से निवेदन है की आप लोग कोसिस करिए की अगर उत्तर प्रदेश कर बटवारा होता है । तो हमें अवध चाहिए... वैसे भी हम लोग अवध के वासी है । और अवध में ही रहना पसंद करेगे। वैसे पहले भी हमारे यहाँ के राजाओ का नाम अवध या अवदेश । और अभी भी हम लोग उत्तर प्रदेश के बाद भी अवध likhate hai...

    धन्यवाद॥

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