शुक्रवार, 9 जनवरी 2009

घुस्कऽ: आज क् अवधी

९-जनवरी-२००९: आज क् अवधी
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घुस्कऽ
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सरकि जा.
(सरक जाइये.)

वाक्य में प्रयोग
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ओहर घुस्कऽ, हमहूँ के बैठइ द.
(उधर सरकिए, मुझे भी बैठने दीजिये)

टिप्पणी:
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ई शब्द अब बहुत कम बोलि जात हऽ.
का ई आप के गाउँ-देश में आज-काल प्रयोग कइ जात हऽ?
जरूर बतावइँ.

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरे आप ईहाँ हौ ,ई तो मज़ा आए गये , भैउआ राम राम || कभो '' अन्योनास्ति के अवध प्रवासो " [ http://anyonasti-avadh-pravaas.blogspot .com ] पै आवा | जहाँ लै हम जनित है जौनपुर से धुर उत्तर ऐ से खींच कै अवधी बोलत हॉएं तो बोलत हॉएं काहे का की उधर पुरबिया के असर आए जावत होए सकत बाटे ||

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  2. हमरे हिसाब से ' बैईठे दा ' होइहे ,वैसे 'दा' या ' द' दुइनो के बिचै के उचारन होइहे

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